Monday, 6 February 2012


नामुराद  को  हासिल  है  नूरे  शम्स  बेनियाज़  ,
बेरंग  जिंदगी  है  तो  , कुदरत  क्या  करे  !!
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नदारद   हैं   जिंदगी   से   उसूल   उनके   सिरे   से   ही  ,
हासिल   हो   जाए   मक़सद   , तो   कब्र   बना   लें   अब्र   में  वो   !! 
(  अब्र  :-  मेघ  ,  बादल   )
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मुझे   आसमानों   से   भी   महज़   ज़मीं   चाहिए   ,
उड़ना   मना   है   मुझको   ,  अब्नाये   ज़मानः   बन   !! 
(  अब्नाये  ज़मानः   :-  अवसरवादी   )
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