नामुराद को हासिल है नूरे शम्स बेनियाज़ ,
बेरंग जिंदगी है तो , कुदरत क्या करे !!
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नदारद हैं जिंदगी से उसूल उनके सिरे से ही ,
हासिल हो जाए मक़सद , तो कब्र बना लें अब्र में वो !!
( अब्र :- मेघ , बादल )
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मुझे आसमानों से भी महज़ ज़मीं चाहिए ,
उड़ना मना है मुझको , अब्नाये ज़मानः बन !!
( अब्नाये ज़मानः :- अवसरवादी )
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