हम ढूँढते रहे ख़ुद को , ज़माने की आँख में ,
और मिले तो आखिर , यार की , आँखों में चुभे हुए !
क्या हुए जो हम , यार की हिफाज़त में रहे तैनात ,
यार को समझ आया , हम , किसी खुराफात , में लगे हुए !!
और मिले तो आखिर , यार की , आँखों में चुभे हुए !
क्या हुए जो हम , यार की हिफाज़त में रहे तैनात ,
यार को समझ आया , हम , किसी खुराफात , में लगे हुए !!
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