Friday, 16 March 2012
Monday, 12 March 2012
हम चले उल्टा , वो ज़माने साथ ,
सामना हर बार हुआ , मंजिल के पास !!
……………
गुज़र उसका भी हुआ और मेरा भी ,
निबाह दोनों ने लिया , फनकारी के साथ !!
…………….
हद से बढ़ जाए न ख़ुमारी ,
इसलिए पीता हूँ तेरे अश्कों को , शबनम के साथ !!
…………….
खुश होता है जहर खाके कोई , मालूम है ,
मरता है शहद खाके कोई , मालूम है ,
पर जो न मालूम था , मालूम आज हो ही गया ,
गम खा के दिलजला , अमर हो ही गया !!
…………..
हंस के देख चंद रोज़ ,
रो के भी देख चंद रोज़ ,
जी के भी देख चंद रोज़ ,
मर के भी देख चंद रोज़ ,
लुत्फ़ क्या है , मुख्तलिफ हालातों में जीने का ,
जाम पी के देख चंद रोज़ ,
कभी गिरा के भी देख चंद रोज़ !!
जानता तू है मुकद्दर मेरा , तो पेश आता अदब से मैं ,
क्या मालूम था , उखड़ेगा तू भी , मैं भी बेअदबी से मेरी !!
………….
दिल की इबारत को , क्योंकर लब तक ले आया तू ,
अब तो लब लरज रहे हैं , और दिल भी बेकाबू है !!
……………
तेरे क़ाबिल तो नहीं है वो ,
पर तेरी ज़िद है तो ये भी सही ,
तू तेरी ज़िद का कायल है तो ,
इक मेरा गुनाह और सही !!
………….
रंजिश है तेरी आँखों में ,
कसमसाती है लपटों की तरह ,
जलाती है उनको भी ,
जिनको रंजिश का पता ही नहीं !!
…………..
हालात बना बेहतर ए ख़ुदा ,
या तू भी , इक बार मोहब्बत कर देख ,
क्यों यार को करता है जुदा ,
जुदा तू भी कायनात से हो कर देख !!
…………….
हालात से लगता तो नहीं ,आयेंगे वो ,
पर वादा करें झूठा , मुमकिन ये भी नहीं !!
………………
ऐतबार था तेरा तभी तो , उलझन में हैं ,
धोखे में कैसे , आये यार , उलझन में हैं !!
रफ़ू कर तो दोगे दिल को मेरे ,
पर तमन्ना जीने की आएगी कैसे !
चाक़ जिगर हो जिसका हमदर्दी से भी ,
पैबंद रूह में उसकी लगाओगे कैसे !!
…………..
और भी हैं रस्ते दिल में उतरने के ,
आँखों को खुलते देखेगा कब तक !!
…………
चिरागों को जलाता जा आग से दिल की ,
सुना है आतिश है नज़र तेरी , और दिल इक शरारा है !!
…………
ख़ादिम का ख्याल कौन करे , जब ,
मालिक को ख़ुदा का खौफ न हो !!
………….
पेशोपेश में मुसाविर है ,
रंग बिना तस्वीर मुकम्मल हो कैसे ,
मैंने ख्वाब जज डाले स्याही के लिए ,
अरमान निचोड़े रंगों के लिए !!
……………
बहुत गहरे तक खोज आया मैं जड़ें अपनी ,
जानवर से ज्यादा कभी न थे हम !!
………….
गुनाहों की माफियाँ सनम देदे तो ,
यार जी जाए कुछ और ,
वर्ना , मरना तो तय है ,
तय वक्त , तय जगह , तय वज़ह से ,
सनम तेरे यार का !!
…………..
तेरी शैतानियों से बाज आये हम ,
हमको रुलाने के सिवा , फ़न कोई तुममें नहीं !!
……………
यार का दर देख लिया ,
मेरे सिवा कोई भी नहीं !!
…………..
यार का घर देख लिया ,
नजाकत के सिवा कुछ भी नहीं !!
…………
कुछ तो करें यार ख़ामोशी से ,
यूँ भी दुनियाँ में शोर बहुत है !!
…………….
कुछ देर , बस कुछ देर रोने दे मुझे ,
आँख भर आई आज , अच्छी खबर आने से !!
आज मिली फुर्सत तो क्यों न तुमसे बोलूँ ,
ए मेरे मन चल , जहां से पार चल दें !
यार चल दें कहीं हम उन , ठंडी हवाओं में ,
ज़हर जमानें का न घुल पाया हो जिसमें अभी तक !
अभी जिसको न रंगीं कर सका हो रंज का रंग ,
न बचपन सा भोलापन जहाँ से गया हो !
चांदनी आती हो जहां बिन खंगाले ,
और बर्फ बिछ जाती हो जहाँ बिन घघरा संभाले !
जहाँ उड़ते हो पंछी निर्भय उडारी , निर्मल गगन में ,
और चोटियों में होड़ लगी हो , आसमान छू लें !
बादल जहाँ छिप छिप जाएँ , दौड़ लगायें ,
कहीं वहीँ ले चल , रे मनवा हम साथ हो लें !!
.............
मैं क्या न देदूं तुम्हें आज ज़मीं से गगन से ,
क्या न देदूं दिल से अपने जो मेरा हो सबसे सुन्दर ,
ये भाव आते हैं जब भी मन में मेरे ,
यार चेहरा बस सामने , इक तुम्हारा ,बस इक तुम्हारा !!
..........
तेरा वितान जमीं अम्बर पर ,
तेरा गान सर्व कर्ण में ,
तेरा स्वर हर कंठ में ,
दृश्य तू है सर्व सर्व ,
तेरा ही है हर पर्व पर्व ,
तू मेरा , मैं तेरा वितान ,
"अनल है प्राणदाता , अनिल जीवन आधार ,
जल , थल से बनी मूरत को स्थान देता आकाश ,
जगत पंचभौतिक , जगतार पंचभौतिक ,
ए मेरे मन चल , जहां से पार चल दें !
यार चल दें कहीं हम उन , ठंडी हवाओं में ,
ज़हर जमानें का न घुल पाया हो जिसमें अभी तक !
अभी जिसको न रंगीं कर सका हो रंज का रंग ,
न बचपन सा भोलापन जहाँ से गया हो !
चांदनी आती हो जहां बिन खंगाले ,
और बर्फ बिछ जाती हो जहाँ बिन घघरा संभाले !
जहाँ उड़ते हो पंछी निर्भय उडारी , निर्मल गगन में ,
और चोटियों में होड़ लगी हो , आसमान छू लें !
बादल जहाँ छिप छिप जाएँ , दौड़ लगायें ,
कहीं वहीँ ले चल , रे मनवा हम साथ हो लें !!
.............
मैं क्या न देदूं तुम्हें आज ज़मीं से गगन से ,
क्या न देदूं दिल से अपने जो मेरा हो सबसे सुन्दर ,
ये भाव आते हैं जब भी मन में मेरे ,
यार चेहरा बस सामने , इक तुम्हारा ,बस इक तुम्हारा !!
..........
तेरा वितान जमीं अम्बर पर ,
तेरा गान सर्व कर्ण में ,
तेरा स्वर हर कंठ में ,
दृश्य तू है सर्व सर्व ,
तेरा ही है हर पर्व पर्व ,
तू मेरा , मैं तेरा वितान ,
हे भगवन हे कृपानिधान !!"
..............
"अनल है प्राणदाता , अनिल जीवन आधार ,
जल , थल से बनी मूरत को स्थान देता आकाश ,
जगत पंचभौतिक , जगतार पंचभौतिक ,
आत्म दृष्यदाता ,परमात्म सर्वज्ञाता ,
विनम्र है नमन मेरा , जगतपति विधाता !!"
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