Friday, 16 March 2012


"Death is definite , and so is aging , it's not new to me , i have felt it ,through my grand parents , parents , friends , relations . And myself have died , inumerable times without knowing it .I feel but pain ,the pain of leaving .Leaving which i can't carry , but feel is mine .So leave mine and rest is peace only peace ."

Monday, 12 March 2012


जंगल  में  चले  चलें  आज ,शहर  बेगाना  हुआ ,
संस्कृति  की  डोर  पकड़  आया  था  शहर  ,
अब  शहर  जंगल  हुआ ,  जंगल   से  अधिक ,
ये  देख  जंगल  का  बशर  जंगल  रवाना  हुआ !!
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डाल  से  बिछुड़े  हैं  जो  , जिंदा   नहीं पत्ते  लेकिन  ,
उदासी  तो  झलक  आती  है  मौसम  में  पतझड़  से  !!


इंसानों   की   दुनियाँ   में   रहूँ   इंसान   काफ़ी   है   ,
रहूँ   आशिक   तेरी   दीद   का   काफ़ी   है  !
रख   पाए   जो   मेरी   मिट्टी   को   मिट्टी   काफ़ी   है   ,
रूह   चले   तुम   तक   ,  ये   काफ़ी   है  !
छू   पाऊँ   तेरे   जज़्बात   को   काफ़ी   है   ,
बस   जाऊं   निगाह   में   तेरी   काफ़ी   है   !
हुनर   इतना   सा   आ   जाए   मुझे   काफ़ी   है   ,
सुन   पाऊँ   तेरे   दिल   की   बात   काफ़ी   है   !!


हम   चले   उल्टा   ,  वो   ज़माने   साथ  ,
सामना   हर   बार   हुआ   ,  मंजिल   के   पास  !!
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गुज़र   उसका   भी   हुआ   और   मेरा   भी  ,
निबाह   दोनों   ने   लिया   ,  फनकारी   के   साथ  !!
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हद   से   बढ़   जाए   न   ख़ुमारी   ,
इसलिए   पीता   हूँ   तेरे   अश्कों   को   ,  शबनम   के   साथ   !!
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खुश   होता   है   जहर   खाके   कोई   ,  मालूम   है   ,
मरता   है   शहद   खाके   कोई   ,  मालूम   है   ,
पर   जो   न   मालूम   था   ,  मालूम   आज   हो   ही   गया   ,
गम   खा   के   दिलजला   ,  अमर   हो   ही   गया   !!
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हंस   के   देख   चंद   रोज़   ,
रो   के   भी   देख   चंद   रोज़   ,
जी   के   भी   देख   चंद   रोज़  ,
मर   के   भी   देख   चंद   रोज़   ,
लुत्फ़   क्या   है   ,  मुख्तलिफ   हालातों   में   जीने   का   ,
जाम   पी   के   देख   चंद   रोज़   , 
कभी   गिरा   के   भी   देख   चंद   रोज़   !!  


जानता   तू   है   मुकद्दर   मेरा   ,  तो   पेश   आता   अदब   से   मैं  ,
क्या   मालूम   था   ,  उखड़ेगा   तू   भी  ,  मैं   भी   बेअदबी  से   मेरी   !!
………….

दिल   की   इबारत   को   ,  क्योंकर   लब   तक   ले   आया   तू  ,
अब   तो   लब  लरज  रहे   हैं   ,  और  दिल   भी   बेकाबू   है   !!
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तेरे   क़ाबिल   तो   नहीं   है   वो   ,
पर   तेरी   ज़िद   है   तो   ये   भी   सही  ,
तू   तेरी   ज़िद   का   कायल   है   तो   ,
इक   मेरा   गुनाह   और   सही  !!
………….
रंजिश   है   तेरी   आँखों   में   ,
कसमसाती   है   लपटों   की   तरह  ,
जलाती   है   उनको   भी   ,
जिनको   रंजिश का  पता   ही   नहीं  !!
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हालात   बना   बेहतर   ए   ख़ुदा   ,
या   तू   भी   ,  इक   बार   मोहब्बत   कर   देख  ,
क्यों   यार   को   करता   है   जुदा   ,
जुदा   तू   भी   कायनात   से   हो   कर   देख  !!
…………….
हालात   से   लगता   तो   नहीं    ,आयेंगे   वो  ,
पर   वादा   करें   झूठा   ,  मुमकिन   ये   भी   नहीं  !!
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ऐतबार   था   तेरा   तभी   तो   ,  उलझन   में   हैं   ,
धोखे   में   कैसे   ,  आये   यार  ,  उलझन   में   हैं   !!

रफ़ू   कर   तो   दोगे   दिल   को   मेरे   ,
पर   तमन्ना   जीने   की   आएगी   कैसे   !
चाक़   जिगर   हो   जिसका   हमदर्दी   से   भी   ,
पैबंद   रूह   में   उसकी   लगाओगे   कैसे   !!
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और   भी   हैं   रस्ते   दिल   में   उतरने   के  ,
आँखों   को   खुलते   देखेगा   कब   तक   !!
…………
चिरागों   को   जलाता   जा   आग   से   दिल   की  ,
सुना   है   आतिश   है   नज़र   तेरी   , और   दिल   इक   शरारा   है  !!
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ख़ादिम   का   ख्याल   कौन   करे   ,  जब  ,
मालिक   को   ख़ुदा   का   खौफ   न   हो  !!
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पेशोपेश   में   मुसाविर   है   , 
रंग   बिना   तस्वीर   मुकम्मल   हो   कैसे   ,
मैंने   ख्वाब   जज   डाले   स्याही   के   लिए  ,
अरमान   निचोड़े   रंगों   के   लिए   !!
……………
बहुत   गहरे   तक   खोज   आया   मैं   जड़ें   अपनी  ,
जानवर   से   ज्यादा   कभी   न   थे   हम  !!
………….

गुनाहों   की   माफियाँ    सनम   देदे   तो   ,
यार   जी   जाए   कुछ   और   ,
वर्ना   ,  मरना  तो   तय   है   ,
तय   वक्त  ,  तय   जगह  ,  तय   वज़ह   से   ,
सनम   तेरे   यार   का   !!
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तेरी   शैतानियों   से   बाज  आये   हम   ,
हमको   रुलाने   के   सिवा  , फ़न   कोई   तुममें   नहीं   !!
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यार   का  दर   देख   लिया   ,
मेरे   सिवा   कोई   भी   नहीं  !!
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यार   का   घर   देख   लिया   ,
नजाकत   के   सिवा   कुछ   भी   नहीं  !!
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कुछ   तो   करें   यार   ख़ामोशी   से   ,
यूँ   भी   दुनियाँ   में   शोर   बहुत   है   !!
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कुछ   देर   ,  बस   कुछ   देर   रोने   दे   मुझे   ,
आँख   भर   आई   आज   ,  अच्छी   खबर   आने   से   !!
आज  मिली  फुर्सत   तो  क्यों  न  तुमसे  बोलूँ ,
ए  मेरे  मन  चल , जहां   से  पार  चल  दें !
यार  चल  दें कहीं  हम  उन , ठंडी  हवाओं  में  ,
ज़हर  जमानें  का  न घुल  पाया  हो  जिसमें अभी  तक !
अभी  जिसको   न  रंगीं  कर  सका  हो रंज  का  रंग ,
न  बचपन  सा  भोलापन  जहाँ से   गया  हो !
चांदनी  आती  हो  जहां  बिन  खंगाले ,
और  बर्फ  बिछ  जाती  हो  जहाँ  बिन  घघरा  संभाले !
जहाँ  उड़ते  हो  पंछी  निर्भय  उडारी  , निर्मल  गगन  में ,
और  चोटियों   में  होड़  लगी  हो  ,  आसमान  छू  लें !
बादल  जहाँ  छिप  छिप  जाएँ  ,  दौड़  लगायें ,
कहीं  वहीँ  ले  चल  , रे  मनवा  हम  साथ  हो  लें !!

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मैं  क्या  न  देदूं  तुम्हें  आज  ज़मीं  से  गगन  से ,
क्या  न  देदूं  दिल  से  अपने  जो  मेरा  हो  सबसे  सुन्दर ,
ये  भाव  आते  हैं  जब  भी  मन  में  मेरे  ,
यार  चेहरा  बस  सामने , इक  तुम्हारा ,बस  इक  तुम्हारा !!

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तेरा  वितान  जमीं  अम्बर  पर  ,
तेरा  गान  सर्व  कर्ण  में  ,
तेरा  स्वर  हर  कंठ  में  ,
दृश्य  तू  है  सर्व  सर्व  ,
तेरा  ही  है  हर  पर्व  पर्व  ,
तू  मेरा  , मैं  तेरा  वितान  ,
हे  भगवन  हे  कृपानिधान  !!"
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"अनल  है  प्राणदाता  , अनिल  जीवन  आधार  ,
जल  , थल  से  बनी  मूरत  को  स्थान  देता  आकाश  ,
जगत  पंचभौतिक  , जगतार  पंचभौतिक  ,
आत्म  दृष्यदाता  ,परमात्म  सर्वज्ञाता  ,
विनम्र  है  नमन  मेरा  , जगतपति  विधाता  !!"