Friday, 25 November 2011
हमेशा रहूँगा मैं , तेरी यादों में , भूल पाए तू मुमकिन नहीं !
तेरे साथ था मेरे हमसफ़र , साए की तरह , है याद क्या ?
राह हमने चुनी , सदा साथ साथ , चाहे ठीक थी या नहीं !
तू रगों में है ,मेरे दौड़ती , खूँ तो बस इक नाम है !!
तेरा रंग है हिना हिना , खुशबू खस और गुलाब की !
तू रच गयी , मेरी रूह में , मेरा बदन तेरे नाम है !!
तू आती है हर ख्वाब में , इक परी स्वर्ग की जैसे हो !
फिर भूलेगी कैसे , तू सच बता , तेरी जिंदगी और जहां हूँ मैं !!
Thursday, 24 November 2011
गिला न कर तू रकीब से , जो मिला तेरा नसीब है !
शुक्र कर तेरे जुबां है , नहीं होता तू ,बेजुबानों में !!
यहीं तो है मेरी मंजिल , ज़रा आगोश में लो ,
बहकाया है राहों ने बहुत , ज़रा आगोश में लो ,
सूखा है हलक मेरा अभी , ज़रा आगोश में लो ,
मर जाऊं ख़ुशी से ना अब , ज़रा आगोश में लो !!
गरम गरम छाए की चुस्कियों में , चीनी महंगी है बोल न तू !
यहाँ सस्ता बिकता सिर्फ ज़मीर है , महंगे सौदे हैं बाक़ी सब !!
साथी मेरे समाज के , समाज के सब्र का इम्तहान लेते हैं ,
और प्रश्न करे समाज जब , उसकी आवाज़ से डर जाते हैं !!
कहते हैं गलत हुआ , गलत हुआ , गलत हुआ ,गीदड़ की भाषा में ,
और समाज के इस प्रश्न का , गला दबाने को ,उमड़ उमड़ आते हैं !!
Wednesday, 23 November 2011
मौला तेरे खिदमतगार तड़पते हैं क्यों ,और गुनाहगार घूमते धड़ल्ले से क्यों ?
सज़ा दे या इनाम , तुरत दे न , पता तो चले हिसाब होता है !!
कसम से कुछ पूछना मत , क्यों लौट वापिस ज़न्नत से आया मैं ?
सिर्फ इतना जान लो , यादें तेरी बस खींच लायीं हैं !!
खुदा भी हैरान था , कमी क्या रह गयी बाक़ी ,
उसे भी न पूछने की कसम , मैं दे के लौट आया हूँ !!
यूँ पूछना , क्या करते हो मुझसे प्यार ?
लगता तो बेमानी है , पर कुछ मायने तो दे दो यार !!
जानता हूँ , हाँ की हाँ में हाँ रही हर बार ,
पर लब खोल दो , कुछ बोल दो , दुश्वारी है क्या कुछ यार ?
छोड़ तो आया हूँ अपने निशाँ , पर देखता हूँ हसरत भी है ?
चाहता हूँ मुझसे मिलें वो , पर फैसला दिल से तो हो !!
वो आज फिर गया कश्ती में निकल तूफानों में ,
लो आज फिर लगी किस्मत की बाज़ी आँधियों में ,
देखते हैं समंदर खजाने ,भर के देता है ?
या फिर मल्लाह बाज़ी जान की अब हार जाता है ?
शायद मेरी किस्मत , बुझे तारों का मरघट है ,
आसमाँ जितने मिले सब , अँधेरा लपेटे थे !
दोस्त जितने मिले सब , फूलों की रंगत लिए थे ,
लिपटे बदन से जब , सांप का फन समेटे थे !!
धुवां उठता घरौंदों से , किसी ने जला डाले अरमान सारे !
धोखा हुआ फिर से , रंगीन सपनों की जलान्ध फैली है सारे में !!
हमसे न बोलिए , न बोलिए कोई बात नहीं , तारों की रात से क्यों , शिकायत कर दी !! मैं तो आया था , चिरागों को लौ लेने , तूने रात से ,अंधेरों की शिकायत कर दी !! मासूम दिल को , राहत की चाहत , न सही , दूर से , जख्म को मरहम तो दिखाया होता !! मैं चला लौट के , सावन में आऊँ या न आऊँ , बरसों बरस , आग में जिया था , सुना तो होता !!
Tuesday, 22 November 2011
दलदलों से निकल जाना माहिरों का काम था ,
मैं तो था मरने को हाज़िर , तुने देखा निकल गया !!
तू रौशन , तेरा नाम रौशन , रौशन तमाम दुनिया तेरी ,
मैं भला था चीज़ क्या , तेरी रौशनी ने जगा दिया !!
लौ दिए की ,रात भर टिमटिमाती रही ,
और अँधेरा कंपकंपाता रहा कोने में सारी रात !
चाँद सूरज हैरान हैं , इस तमाशे से ,
तारों को कर इकठ्ठा सुना रहे ज़ज्बात !
जो हम से न हो सका सारी उमर ,
कर दिखाई इस दिए ने वो करामात !!
मैं तो था मरने को हाज़िर , तुने देखा निकल गया !!
तू रौशन , तेरा नाम रौशन , रौशन तमाम दुनिया तेरी ,
मैं भला था चीज़ क्या , तेरी रौशनी ने जगा दिया !!
लौ दिए की ,रात भर टिमटिमाती रही ,
और अँधेरा कंपकंपाता रहा कोने में सारी रात !
चाँद सूरज हैरान हैं , इस तमाशे से ,
तारों को कर इकठ्ठा सुना रहे ज़ज्बात !
जो हम से न हो सका सारी उमर ,
कर दिखाई इस दिए ने वो करामात !!
दलदलों से निकल जाना माहिरों का काम था ,
मैं तो था मरने को हाज़िर , तुने देखा निकल गया !!
तू रौशन , तेरा नाम रौशन , रौशन तमाम दुनिया तेरी ,
मैं भला था चीज़ क्या , तेरी रौशनी ने जगा दिया !!
लौ दिए की ,रात भर टिमटिमाती रही ,
और अँधेरा कंपकंपाता रहा कोने में सारी रात !
चाँद सूरज हैरान हैं , इस तमाशे से ,
तारों को कर इकठ्ठा सुना रहे ज़ज्बात !
जो हम से न हो सका सारी उमर ,
कर दिखाई इस दिए ने वो करामात !!
मैं तो था मरने को हाज़िर , तुने देखा निकल गया !!
तू रौशन , तेरा नाम रौशन , रौशन तमाम दुनिया तेरी ,
मैं भला था चीज़ क्या , तेरी रौशनी ने जगा दिया !!
लौ दिए की ,रात भर टिमटिमाती रही ,
और अँधेरा कंपकंपाता रहा कोने में सारी रात !
चाँद सूरज हैरान हैं , इस तमाशे से ,
तारों को कर इकठ्ठा सुना रहे ज़ज्बात !
जो हम से न हो सका सारी उमर ,
कर दिखाई इस दिए ने वो करामात !!
दलदलों से निकल जाना माहिरों का काम था ,
मैं तो था मरने को हाज़िर , तुने देखा निकल गया !!
तू रौशन , तेरा नाम रौशन , रौशन तमाम दुनिया तेरी ,
मैं भला था चीज़ क्या , तेरी रौशनी ने जगा दिया !!
लौ दिए की ,रात भर टिमटिमाती रही ,
और अँधेरा कंपकंपाता रहा कोने में सारी रात !
चाँद सूरज हैरान हैं , इस तमाशे से ,
तारों को कर इकठ्ठा सुना रहे ज़ज्बात !
जो हम से न हो सका सारी उमर ,
कर दिखाई इस दिए ने वो करामात !!
मैं तो था मरने को हाज़िर , तुने देखा निकल गया !!
तू रौशन , तेरा नाम रौशन , रौशन तमाम दुनिया तेरी ,
मैं भला था चीज़ क्या , तेरी रौशनी ने जगा दिया !!
लौ दिए की ,रात भर टिमटिमाती रही ,
और अँधेरा कंपकंपाता रहा कोने में सारी रात !
चाँद सूरज हैरान हैं , इस तमाशे से ,
तारों को कर इकठ्ठा सुना रहे ज़ज्बात !
जो हम से न हो सका सारी उमर ,
कर दिखाई इस दिए ने वो करामात !!
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