Wednesday, 29 August 2012

थका कहाँ था मैं ?
थक गये पाँव थे ,
जम गयी थी शिराएँ ,
दृष्टि बढ़ चली थी , अंधत्व की  तरफ ,
कर्ण सुनते नहीं थे शब्द कोई ,
अन्न बिना पचे पड़ा था पेट में मेरे ,
पर मैं चला जा रहा था ,
निःशब्द , निडर ,
मृत्यु पथ पर ,
नए जन्म की  ओर ,
हर हार के बाद !!

Saturday, 5 May 2012


"उनसे  हमें  थी  झूमते  आस्मां  की  उम्मीद  ,
पल  में  गिरा  ज़मीं  पे  हमें  दिया !!"
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"ग़ज़ल  के  रंग  दिल  में  , और  दिल  में  ग़ज़ल  तू ,
तेरी  तस्वीर  का  रुख  ,मेरी  तरफ  हो  और  तू  हो  तकदीर  मेरी  ,
ऐसा  वक्त  आये  तो  क्या  ? क्या  ग़ज़ल  फिर  होगी  खुदा  !!"
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"नक़ल  के  भाव  बढ़े  इतने  , के  असल  सस्ती  लगे  अब  ,
अब  असल  को  असल  कहते  हुए  डर  लगता  है  !!"
...........
चला  जा  थोड़ी  देर  को  तू  , रंगे  महफ़िल  से  ऐ  खुदा  ,
महफ़िल  को  भी  तो  एहसास  हो  , खुदा  होता  है  क्या  !!"
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चुभने  लगे  फिर  प्यार  के  आंसू  ,
इन  अश्को  को  भी  मालूम  है  ,
कितना  नरम  दिल  हूँ  मैं  !!"
............
दिल  के  आईने  में  धुंध  सी  है  ,
मेरे  हुज़ूर  और  मैं  ,
बदल  बदल  दिखते  हैं  !!
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"किसके  हिस्से  में  कौन  आया , न  बता  ,
मैं  तेरे  हिस्से  में  हूँ  के  नहीं  , ये  बता  , काफी  है  !!"

Wednesday, 25 April 2012


"चाँद सवेरा ले आएगा , लगता है क्यूँ ,
मेरा मन पुच्छल तारा बन उम्मीद जगाये ,
अवलोकन करते जन में ज्यूँ !!"
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"जलने दे जिया कुछ और अभी ,
भटके पंथी , आस लगाये किरणों की अभी !!"
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"चलने दे अभी , मस्त जहां को छलने दे अभी ,
बेपरवाह सितारों को , चाँद की चाल , चलने दे अभी !!"
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"ग़ज़ल  के  रंग  दिल  में  , और  दिल  में  ग़ज़ल  तू ,
तेरी  तस्वीर  का  रुख  ,मेरी  तरफ  हो  और  तू  हो  तकदीर  मेरी  ,
ऐसा  वक्त  आये  तो  क्या  ? क्या  ग़ज़ल , फिर , होगी  खुदा  !!"
............
नक़ल  के  भाव  बढ़े  इतने  , के  असल  सस्ती  लगे  अब  ,
अब  असल  को  असल  कहते  हुए  डर  लगता  है  !!"
...........
"चला  जा  थोड़ी  देर  को  तू  , रंगे  महफ़िल  से  ऐ  खुदा  ,
महफ़िल  को  भी  तो  एहसास   हो  , खुदा  होता  है  क्या  !!"
.........
"चुभने  लगे  फिर  प्यार  के  आंसू  ,
इन  अश्कों  को  भी  मालूम  है  ,
कितना  नर्म  दिल  हूँ  मैं  !!"
.............
"दिल  के  आईने  में  धुंध  सी  है  ,
मेरे  हुजुर  और  मैं  , बदल  बदल  दिखते  हैं  !!"
...........
"किसके  हिस्से  में  कौन  आया  न  बता  ,
मैं  तेरे  हिस्से  में  हूँ  के  नहीं  , ये  बता  , काफी  है  !!"
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"आराम  से  राम  का  ले  नाम  ,
सनम  तो  वैसे  भी  तुम्हारे  हैं  ,
पर  नाम  में  है  आराम  और  केवल  आराम  !!"
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"मजूरी  करूँ  दिल  से , न  कोई  मजबूरी  ,
जब  मालिक  मेरा  सनम  होवे  ,
गुलामी  भी  शाम  सिन्दूरी  !!"
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"दूध  को  दही  बना  आया  ,
अब  खीर  बनादे  , कहे  यार , खुदाया  !!
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"अंदाज़  मेरे  सब  तुमसे  शुरू  और  तुम  पे  ख़तम  ,
मेरा  नाम  भी  बस  मेरा  नहीं  , जो  तुम  न  पुकारो , तो  !!"
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"हर  जन्म  कोई , जिस्म  मैं  ढोता  हूँ  ,
और  बोझ  उतरने  पे  रोता  हूँ  !!"
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"हमसे  उम्मीद  सितारों  की  रक्खे  है  जो  ,
कैसे  उससे  कहदें  के  खाक  भी  हाथों  में  नहीं  मेरे  !
उनकी  उम्मीद  से  जिंदा  मैं  भी  हूँ  ,
उठते  उसके  साथ  ही  दुआ  में  हाथ  मेरे  !!"
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"सिर्फ  उतनी  दूर  चलो  साथ  मेरे  ,
के  दूरी  भी  तय  हो  और  मन  भी  न  भरे  !!"
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किताबों  से  निकल  बहार  आये  अक्षर  ,थोड़ी  हो  जाए  धूप  ,
बंद  वर्षों  से  हैं  हम  , कोई  हमसे  बतियाता  नहीं  !!"



Sunday, 22 April 2012


"मैं  वक्त  का  गुलाम  हूँ  , मुझे  हर  घड़ी  नचाये  वक्त  ,
कभी  डुस्कुओं  रुलाये  वक्त  , कभी  खिलखिला  के  हंसाये  वक्त  !!
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"मयकदे  में  हालात  अच्छे  न  अब  ,
सूरते  हालात  अच्छे  न  अब  ,
हर  हलक  को  चाहिए  , जाम  अनगिनत  ,
और  गम  का  नशा  , सब  बिखरा  सा  है  !!"
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"दिलकश  हैं  नज़ारे  तो  मुबारिक  तुम्हें  ,
अपना  तो  माज़ी  है  रूठा  हुआ  !!"
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बदला  ज़माना  और  बदले  हैं  वो  ,
हर  कदम  पर  मरने  की  धमकी  दें  वो  ,
उनको  मालूम  है  मैं  उनसे  डरता  नहीं  ,
अब  हालात  की  गर्मी  में  जलाने  लगे वो !!"
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"कुछ  तो  होंगे  हालात  , बद  से  भी  बदतर  ,
यूँ  ही  शह्नयिओन  की  धुन  , मातमी  न हुई  होगी  !!"
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"मुझको  गम  दे  के  चले  तो  हो  , बंदापरवर  ,
पर  ये  गम  मुझको  परेशां  नहीं  करते  ,
मैं  तो  हालात  को  पैमाना  बना  ,
गम  का  रोज़  नशा  करता  हूँ  !!"
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"इक  सितारा  मेरी  खुशियों  का  भी  था  दुनियां  में  ,
टूट  के  कब  राख  हुआ  , देखा  ही  नहीं  !!"
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"मैं  बिखर  गया  जहां  में  टुकड़ा  , टुकड़ा  ,
सहेज  , समेट  के  रखना  , कहीं  मिल  जाए  अगर  !!"
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मुझको  कभी  चाँद  दिखाना  मत  ,
चांदनी  दिन  में  ही  छल  गयी  कई  बार  !!"
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"किसी  अजनबी  को  भी  पीड़ा  में  देख  चिंतित  होना  , स्वाभाव  है  मेरा  , कोशिश  नहीं  ,
और  इस  स्वाभाव  ने  रुलाया  बहुत  , दुखाया  बहुत  , और  धोखे  भी  बहुत  खाए  मैंने  ,
पर  संभव  नहीं  बदलूँगा  मैं  ,या  स्वाभाव  मेरा  !!"
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"कौन  सितारा  है  जो  ,चमकना  न  चाहे  ,
पर  जल  जाना  चाह  में  , हर  किस्मत  में  कहाँ  !!"
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"बटोही  को  , दो  टुकड़ा  , छांह  से  मतलब  ,
जात  क्या  पूछूं  , पेड़  कौन  सा  ?"
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"मोहब्बत  अगर  दिमाग  से  होती  तो  दिल  रोता  ,
अब  दिल  से  है  तो  भी  रोता  है  दिल  , सुभानल्लाह  !!
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"खानाबदोश  को  ज़मीं  से  क्या  ,
जहाँ  चल  दिए  , वहीँ  वतन  अपना  !!"
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"चलो  जिंदगी  की  कश्मकश  से  निजात  पा  लें  दो  घड़ी  ,
झूठ  ही  सही  , पर  खुदा  को  खुद  बना  दें  दो  घड़ी  !!"
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"दिल  खोल  हंस  लिए  , अपनी  गल्तियों  पे  आज  ,
अगर  सदा  होते  सही  तो  , पछताते  हम  आज  !!"
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उनसे  हमें  थी  झूमते  आस्मां  की  उम्मीद  ,
पल  में  गिरा  ज़मीं  पे  हमें  चल  दिए  !!"
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बर्फानी  आशाओं  में  इक  चिंगारी  छोड़ी  , 
अब  खुश  हैं  वो  आग  , तबाही  से  !!

Friday, 20 April 2012


"चलो  चलके  झील  में  हंसों  से  बतियाएं  ,
चुने  मोती  कितने  , कितना  अलग  किया  पानी  ,
कितना  दूध  मिला  था  , मानसरोवर  में  ,
जो  नदियों  में  बहना  भूल  गया  है  अब  ,
कौन  थी  गुजरिया  , क्या  नाम  उसका  था  ,
जिसने  नदिया  का  दूध  बिलोया  था  ,
और  नदी  का  दूध  बन  गया  पानी  ,
चलो  हंसों  से  पूछें  आज  !!"
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"इस  जहाँ  में  कुछ  अकेले  , जग  से  खेले  ,
अब  अकेले  ही  झुण्ड  का  अहसास  देते  हैं  ,
और  असंभव  दिखने  वाला  कम  ,
सहज  में  करके  जाते  हैं  !!"
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बहुत  बोल  लिए  अब  , कुछ  मौन  हो  जाए  ,
इक  चुप  बस  इक  चुप  , समाधान  हो  जाए  !!"
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"खली  हाथ  चले  आओ  , किसने  कहा  ख़ाली  है  जहाँ  ,
ख़ाली  हाथ  चले  चलो  , भरा  वो  जहाँ  भी  है  !!"
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"बहुत  बार  किया  मैंने  कुछ  ऐसा  , अपनों  को  पराया  कर  आया  ,
जिसको  समझा  था  मैं  दगा  , वो  निकला  वफ़ा  का  साया  !!"
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"सगरे  जगत  में  तू  तारणहार  ,
जगत  भी  तू  और  नाव  भी  तू  ,
सवार  भी  तू  और  पतवार  भी  तू  ,
फिर  क्यों  झंझट  में  मन  है  ,
करता  भी  तू  ,करतार  भी  तू  !!"
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"जड़  से  जुडूं  और  उडूं  आकाश  ,
ऐसे  हैं  एक  सहारे ,
माँ  बाप  हमारे  पेड़  सामान  !!"
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"सिर्फ  मन  है  मेरे  साथ  , जो  दिल  को  मना  लेता  है  ,
बिगाडूँ  उसे  भी  , मेरे  बस  में  कहाँ  ."
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"दिल  से  खेलोगे  और  दाद  मिलेगी  ,
यार  वहम  ये  कितना  अच्छा  है  !!"
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"मैं  नहीं  कहता  मुझे  शायर  मान  ,
दिल  का  मारा  तो  कह  ही  सकते  हो  ,
तू  तारीफ़  में  न  बोल  , कुछ  मीठे  बोल  ,
दारू  सा  कड़वा  कुछ  , हलक  में  तो  घोल  !!"
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"मुझे  संदेशे  कोई  नहीं  आते  , और  मैं  उब  भी  गया  हूँ  मेलों  से  ,
जिन  रिश्तों   में  नहीं  अपनापन  , उनको  खींचने  की  ज़रुरत  भी क्या  है  !!"
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"प्याला  मेरा  भर  दे  कोई  , अंगूरी  अंगूरी  ,
तन्हाई  के  आलम  में  , शाम  बने  सिन्दूरी  सिन्दूरी  ,
अपने  कहाँ  मिलते  हैं  ज़माने  में  अब  ,
इक  जाम  जिगर  में  हो  तंदूरी  तंदूरी  !!
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"आओ  चलो  करलें  तौबा  , न  तुम  बोलो  , न  मैं  बोलूँ  ,
बस  एक  चांदनी  की  चादर  , खामोश , शिकायत  पे  डालें  !!"
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"न  कोई  चाहने  वाला  फिर  भी  , इक  आवाज़  लगाता  हूँ  , आये  कोई  !
अपना  न  कहे  , हसरत  से  चाहे  मुझे  , पर  पास  बुला  , बहला  भर  जाए  कोई  !!"
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"घूँट  दर  घूँट  , पीता  ही  गया  कड़वे  घूँट  ,
अब  न  दिल  ख़ाली  न  जिगर  ख़ाली  !!"
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"सूरज  , पवन  , आकाश  , जल  , पृथ्वी  के  बिना  जीवन  कहाँ  ?
पर  वो अपने  कर्तव्यों  का  रोना  कभी  नहीं  रोते  ,
और  एक  हम  , हर  कदम  एहसान  जताए  जाते  हैं  !!"


यूँ  ही  ऊंचाईयों  पे  जा  बैठे  परिंदे  , आकाश  अपना  समझ  बैठे  हैं  ,
रात  ढलने  पर  आसरा  मिलता  है  तो  जमीं  पे  बस  !!"
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"हर  तरफ  उम्मीद  बस  उम्मीद  ,
और  नासूर  भरते  नहीं  देश  के  मेरे  !!"
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"इक  घरौंदा   , रोटी  इक  , और  तन  को  कपडा  न  मिले  सबको  तो  ,
आजादी  किसका  नाम  और  करनी  भी  क्या  !!"
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"चारों  तरफ  ही  है  शोर  , चोर  चोर  , चोर  चोर  ,
सिपाही  इस  खेल  में  अब  कोई  बचा  ही  नहीं  !!"
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"जो  भी  बचा  है  देशप्रेमी  इस  देश  में  ,
है  परीशां  ,कौन  है  जिसको  सुनाएं  , दिल  का  हाल  !!"
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"जो  भी  उठता  आवाज  , सुधरो  और  सुधारो  ,
उसको  बची  बस इक  जगह , बस , जेल  जेल  , जेल  जेल  !!"
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"सब  निवासी  उदास  हैं  और  बे - आस  हैं  , राजनीति  में  भरे  सब  ....................

Wednesday, 18 April 2012

प्रथम  अभिव्यक्ति  हो  मेरी  तुम ,
अब  तुम  ही  रहो  मौन , तो  क्या  किस्मत ?
प्रथम  संध्या  हो  मेरी  तुम ,
अब  तुम  ही  रहो  गौण , तो  क्या  किस्मत ?
प्रथम  दिवस  हो  तुम  मेरा  ,
अब  तुम  ही  न  जागो , तो  क्या  किस्मत ?
प्रथम  रात्रि  हो  मेरी  तुम ,
अब  तुम  ही  बनो  स्वप्न , तो क्या  किस्मत ?