Tuesday, 6 August 2013

कभी  उन  पगडंडियों  को  निहारा  तो , हैरान  हुए  हम ,
बस  में  तो  नहीं  था  ,शुक्र  खुदा ,  पर , लांघ  आये  हम  !!

Monday, 5 August 2013

बूझो  तो  जानो  ,  कह  ,  पीड़ ,  मुखातिब  है ,
और  बेपीर  ,  जान  के  भी  अनजान  खड़ा   है  ,
हाथों    में  भूख    के ,  देख   भीख   कटोरा  , 
राही  फेर  के  मुख  ,  अंधों  सा  खड़ा  है  !!
चूम  लूं  अधरों  को , अये  वीणा , भुजंग  सम ,
पर  मालूम  है  मुझको  तेरे  सपेरे  की  मंशा ,
मुझे  गर्व  है  सच  में  ,  अपनी  चतुराई  पर  ,
पर  छल  बल  में  छलिया ,  तेरा  लेगा  सहारा !!
भला  ऐसे  भी  रूठा  है  कोई  ज़िद  करके ?
हमने  तो  सुना  है  ,  जो  रूठा  , रूठा ,  चाहत  में मनौव्वल  की  !!

Saturday, 3 August 2013

दबते  हैं  जो  ,  बहुत  शोर  करते  हैं ,
पर  तुम्हारे  कान  ,  पैरों  से  बहुत  दूर  होते  हैं  ,
सम्वेदना  हो ,  पाँव  में  तेरे  तो  ,
चीत्कार  ,  धमनियों  से  , दिल  तक  आते  हैं !!
चलते  हैं बेखबर  कभी , अपने  से  भी  हम ,
मन  कहीं  होता  है  अपना , और  कहीं , अपने  कदम !!
बहुत आजमाया  खुदा को ,  पर  खुदा  ,  खुदा  निकला !
और  मैं  उसकी  रियाया  में , उसके  रहम  का  करम  निकला !!