कभी उन पगडंडियों को निहारा तो , हैरान हुए हम ,
बस में तो नहीं था ,शुक्र खुदा , पर , लांघ आये हम !!
Monday, 5 August 2013
बूझो तो जानो , कह , पीड़ , मुखातिब है ,
और बेपीर , जान के भी अनजान खड़ा है ,
हाथों में भूख के , देख भीख कटोरा ,
राही फेर के मुख , अंधों सा खड़ा है !!
चूम लूं अधरों को , अये वीणा , भुजंग सम ,
पर मालूम है मुझको तेरे सपेरे की मंशा ,
मुझे गर्व है सच में , अपनी चतुराई पर ,
पर छल बल में छलिया , तेरा लेगा सहारा !!
भला ऐसे भी रूठा है कोई ज़िद करके ?
हमने तो सुना है , जो रूठा , रूठा , चाहत में मनौव्वल की !!
Saturday, 3 August 2013
दबते हैं जो , बहुत शोर करते हैं ,
पर तुम्हारे कान , पैरों से बहुत दूर होते हैं ,
सम्वेदना हो , पाँव में तेरे तो ,
चीत्कार , धमनियों से , दिल तक आते हैं !!
चलते हैं बेखबर कभी , अपने से भी हम ,
मन कहीं होता है अपना , और कहीं , अपने कदम !!
बहुत आजमाया खुदा को , पर खुदा , खुदा निकला !
और मैं उसकी रियाया में , उसके रहम का करम निकला !!