Wednesday, 3 April 2013

हल्की सी  हवा  आने  दो ,
घुटन  है  बहुत ,
साँस की  लय , संभल जाने  दो ,
मैं  भी  पी  लूं  कुछ कड़वी  दवा  ,
ऊपर की  कमाई के  गुर , लेने  दो ,
अब न  चलन है ,  सज़ा  का  कुछ भी ,
दो चार गुनाह कर  लेने  दो !
मेरे  बच्चों को  भी देनी है डोनेशन ,
चुनना  है अच्छा  सा  प्रोफेशन ,
मेरी सामर्थ्य  को  भी कुछ पलने  दो ,
कुछ आगे  बढ़ने दो !
डॉक्टर भी कुछ  हैं  परेशान ,
मेरे  खून में  कुछ है  कमियाँ ,
इन विकास की  विधियों से मुझको ,
रिएक्शन होता  है , मेहरबान ,
इसलिए ,
हलकी  सी  हवा  आने  दो ,
भ्रष्ट  देश  का  भ्रष्ट नागरिक ,
मुझको  भी  बन  जाने  दो ,
सांस ज़रा संभल जाने  दो !!


मासूम सी  हरकत  मेरी , और  छेड़  कर वो गये ,
लगता  है उनको बार बार , किसीका तड़पना खुशगवार !!
आ चलें ,
कुछ कदम ,
कुछ भला ,  कर जाएँ हम ,
पहचानें कोई ,  न इसलिए ,
पर है ये धर्म इसलिए !
ये जिंदगी जो चल रही ,
है निरंतर धार ये ,
पर केवल तब तलक ,
जब है न बस ,  निस्सार ये !!
अजनबी थे तब तक , मिले थे न राहों में ,
अब राह चलते मौन ? जुल्म नहीं तो क्या ?

गुज़रे  कोई  गली  से , मंज़ूर  है  नहीं ,
मेरा रहना उस  जगह , जहां मैं भी मैं  नहीं !!


मुद्दा नहीं है  कोई ,  दोस्त बना  नहीं ,
दुश्मन बना  वो  कैसे , परेशानी है  बस  यही !!
बहुत  रंग  देख  लिए तेरे इस  जहां में ,
राम रंग  देखें अब , समय आ  गया है ,
बेरंग रंग हो  गये , दुनियाँ के मेरे  सामने ,
डूबें तेरे रंग  में , अब  समय आ गया है !!